Sunday, 12 August 2012

ये मेरा इंडिया

रोते बच्चे की ममता की आस हैं, ये मेरा इंडिया 
धूप मे चिलचिलाते रेगिस्तानो की प्यास है, ये मेरा इंडिया 
सूखे से पेड़ मैं सावन की, तलाश है "ये" मेरा इंडिया
 
हर दिन कुछ नया कर जाने की, प्रगति पाने की प्यास हैं, ये मेरा इंडिया 
बोर्डर पे लड़ते जवानों की घर आने की आस हैं, ये मेरा इंडिया 
ईमानदार  नेताओ की, देशभक्त  जवानों की आवाज़ हैं, ये मेरा इंडिया 
रोते हुवों को हँसाने की, प्यार बरसाने, मदद करते जाने की सौगात हैं "ये" मेरा इंडिया 
सपनो की, कथा कहानियों  की ग्रंथो रामायणों की अताहः हैं ये मेरा इंडिया
 
और आज 
महंगाई के असमानों की, बहकते नौजवानों की, बेघर बेगानों की तलाश है ये मेरा इंडिया
घुसखोर इंसानों की, बेशरम  नौजवानों की,  बिखरते अरमानो की जमात हैं ये मेरा इंडिया   
दंगो मैं पलती, राख मैं बदलती तड़पती-सड़ते हुए अरमानो की, corruption की, नपुंसक लाश हैं ये मेरा इंडिया 
  
परन्तु 
नए प्रद्योगिक खजानों की, नए विज्ञानों की, बेहतर मकामो की श्वास हैं ये मेरा इंडिया 
नयी चाहो की, नयी रहो की आज के युवा के ....  पास  हैं ये मेरा इंडिया 
आओ कदम दो बड़ा लो, बचा लो इसे, वर्ना बचेगा नहीं - "ये मेरा इंडिया 

Thursday, 2 February 2012

TRUTH ....

I don't seem to exist anymore.....
and my presence....is not observed..
I do stand out see people pass by....one or two looking at me..
scratching me....trying to friend me...
But some else....pulls them away and they easily sway..and go away..
They keep staring at me...wanting me ...cursing me
They keep on trying half heartedly....they even pray.....
Oh God is there no body with him?? No-no, no way
All of them just want to pray....

Sincerely yours
TRUTH !

Tuesday, 17 January 2012

Its been ... ... ...

Its been years since I have, had a good night  sleep
Its been years since I shared my feelings, was sad and weeped
Its been time since I have met any friends
Its been time ..and alas I have accepted the tends
Its been a while I jumped out of joy, burst out in laughter or played a con
Its been a while I said it .."damn it I don care bring it on...


Its been years since I had that conversation where i could have said it all
Its been years since the kingdom in and around me was on full glory but now it has to fall
Its been time since I said I care..
Its been time since i did anything out of a dare
Its been a while and I miss my life, and I am just playing a safe game
Its been a while I want to break free, change the living  but its still the same


Its been so long I have just thought about only thinking to do it....
Its bee very long and its decided its affirmative......I am going to DO it ;)

Saturday, 3 December 2011

तू और मैं .....

तुझ पे हैं ये एहसान,
बना दिया मैंने तुझको इंसान 
होना था कुछ और तुझे
बना दिया साला इंसान बेवजह
अब तू इंसान कहलाता हैं
पर तुझमे और जानवरों मैं फर्क कहा नज़र आता हैं
मार कट, लव सेक्स और धोखा सब हैं तेरे पास
टाइम आने पे जरूरत मैं कर ही लेता हैं तू मेरी अरदास
भुला बैठा है तू इंसानियत, तो मैं भी भुला बैठा हूँ तुझे
इंसानियत भुला दी हैं तुने, बस आब ख़तम भी कर दूंगा जल्द ही तुझे ! ................

Saturday, 15 October 2011

भागम भाग

हम सारी उम्र भागने मैं निकाल देते हैं ....और शायद ऐसी चीजों के लिए जिनके पाने के बाद हमें लगता है साला...इसके लिए की थी भागदौड़....
हम अपने सपने छोड़ के किसी और के सपनो को पूरा करने भागता है .....खुद सपने देखना भूल जाते हैं दुसरो के सपनो मैं जीते हैं ...
अपना कोई सपना साला आये भी तो ....सोचते हैं ,... ये तो वहम हैं भाई ....जागो जो सपने के पीछे भाग रहे थे उठो ....फिर से भागो ...
भागना  ....इन्सान की प्रवति का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं .....बचपन मैं माँ - बाबा की पिटाई से भागना...
पडोसी का कांच तोड़ के भागना .... किसी के साथ मस्करी कर डांट, मार ना पढ़ जाये इसके लिए भागना...
स्कूल ना जाने से भागना ....स्कूल जाके स्कूल बंक करके भागना...
स्कूल मैं प्यार हो जाये तो लड़की के पीछे भागना ...
उसके भाई या बापू को पता चले तो उनकी पिटाई से बचने के लिए भागना
अब्सेंट हो जाये तो दोस्तों के पीछे home वर्क के लिए भागना ...
10 -11 th  क्लास के बाद माँ बाप से बहन - भाई से दूर भागना ....
मैं बड़ा हो गया हूँ ये सोच के ....बड़ो से भागना उनकी सलाह से भागना
स्कूल के बाद कॉलेज के लिए भागना ....कॉलेज मैं अब्सेंट ना हो जाये XX ना लग जाये ..इसके लिए ना चाहते हुए भागना
कॉलेज मैं भी प्यार हो जाये तो लड़की के पीछे भागना...
और प्यार नहीं हो, तो प्यार की खोज मैं भागना ..
फिनाल इयर मैं ...जॉब की तलाश मैं यहाँ वहां भागना......और उससे पहले के सालों मैं RESUME  को अच्छा करने के लिए यहाँ वहां भागना ...
जॉब ज्वाइन करके satisfaction ना पाके,  नए जॉब के पीछे भागना
और कुछ नहीं तो MBA , CFA  etc के पीछे भागना की कहें तो कुछ नया ह़ो
जॉब मैं रहके गर्ल फ्रेंड बनाने के लिए यहाँ वहां भागना .....
कुछ टाइम जॉब मैं काम से भागना....बॉस के सामने दिखने के लिए भागना ....
अपने दोस्तों की settled / unsettled लाइफ से जल के या डर के अपनी लाइफ को अच्छा करने की आस लेके भागना ...
दोस्तों के सवालो के जवाब ना देना पढ़े इसलिए उनके फ़ोन, समस, चाट से यहाँ तक की उनकी लाइफ के सलेब्रतिओं से भागना ....
कुछ ना ह़ो तो कुछ करने के लिए भागना..... प्यार नहीं हुआ तो सेत्तले होने के लिए शादी के लिए लड़की देखने के लिए ...यहाँ वहां भागना
शादी होने के बाद एकांत ढूँढने के लिए भागना.... ...
थोड़े टाइम बाद रिश्तो को सरदर्द समझ के रिश्तो से भागना.....अपनी monotonous लाइफ से बोरियत दूर करने के लिए भागना ...
थक हार के भी ....बच्चो के साथ भागना ....बच्चो के पीछे भागना .....उनके स्कूल कॉलेज की जरूरतों को पूरा करने के लिए भागना ....
भागना भागना ,,,,,,,और भागना......और इसी भागम भाग मैं हम खुद से  ही भागने लगते हैं .....
और जब साला retirement   के बाद खुद के लिए टाइम मिलता हैं भागम भाग से मुक्ति मिलती हैं तो
हमें लगता हैं जन्दगी साली कितनी बेईमान हैं ....कितना भागती हैं ....और हमें अपने पीछे भागाति रहती हैं ....भागती रहती हैं  ......भागाति रहती है..

Wednesday, 10 August 2011

कुछ दोस्त

कुछ दोस्त यूहीं जुड़ते हैं फिर भीड़ मैं खो जाते हैं , और कई चेहरे इस दोस्त खाने वाली भीड़ मे अपने से नज़र आते हैं
कुछ हमें छोड़ देते हैं और कुछ को हम पीछे छोड़ आते हैं , ना जाने कितने नए चेहरों से 'हम' जुड़ जाते हैं
हम पुराने दोस्तों को खोके  उनकी यादों  को भी भीड़ मैं खो देते हैं, पर
असलियत तो ये हैं उनकी यादे हमारे ज़हन के किसी भीतरी कोने मैं छुपी होती हैं
और जब भी हमें वो यादे याद आते हैं .,..आँखों मैं नमी और लबो पे हसी ले आते हैं
हमें हमारे  बीते वक़्त मैं ले जाते है , वो मस्ती वो मज़ा वो प्यार वो तकरार वो बात बात पे लड़ना और वो यू पल मैं ही मन जाना
वो पैसे जुगाड़ करके मूवी जाना, और मूवी से जादा बाजु मैं बैठे couple को देखना
वो बिना प्लान करी गयी ट्रिप्स वो सारे मजाक वो बात बात मे टांग खीचना
आप सोचते हैं आप भुला चुके है पर आपके ज़हन के किसी कोने मैं वो अभी भी छुपी होती हैं .....
हम नए दोस्त तो बना लेते हैं .....पर उनमें भी हमारे पुराने दोस्तों को तलाशते है .....
बिलकुल उसके जैसा हैं ...क्या यार इसे क्यूँ दोस्त बनाया इससे आचा तो अपना XYZ  था
बस इसी सोच विचार मैं इसी तरह से बदलती दोस्ती और प्यार मैं हम जीते जाते हैं
भीड़ मे  ही दोस्तों को खोते हैं और उसी दोस्त खाने वाली भीड़ मैं से नए दोस्त बना जाते हैं  .......

Wednesday, 27 July 2011

सोच

सोचना एक अपराध  सा बनता जा रहा हैं मेर लिए ..
कब क्या क्यूँ ? ये वो  ..ना जाने क्या क्या सवाल आते है  दिमाग मैं और जब इन सवालो के जवाबों को तलाशने जाता हूँ तो नजाने मन कहाँ भटक जाता है दिल साला कही और की सोचने लगता ..
ये साली सोच बड़ी ही खतरनाक चीज है ना जाने किसको क्या बना देती हैं चूतिये को सुपर हीरो, और हीरो को सुपर विल्लन बन देती है 
एक सोच मेरी भी .....एक क्या अनेको चीजो को सोचता हूँ एक साथ ....इसी के चलते सब रिश्ते नाते दोस्त प्यार व्यार सब साला भुला बैठा हूँ 
अजीब सा हो गया हूँ इस सोच के चलते ....या अजीब था और अजीब सोचने लगा हूँ और अब जो हूँ वो दोनों का मिश्रित फल हैं 
जमाना हो गया किसी दोस्त से बात किये ...सोचता हूँ क्या कभी दोस्त भी बनाये थे ?..या बस ...HI HELLO  वाले साथी थे  ?
मैं उनको शायद कभी याद कर लेता हूँ और उनसे बात करने के लिए फ़ोन उठता भी हूँ बुत ये सोच "साले उनको मैं कभी याद नहीं आता वो मेरे बारे मैं कभी नहीं "सोचते " क्या ?
या वो लोग भी ऐसी ही किसी सोच का शिकार होके मुझे और बाकि दोस्तों से दूरी बनाये हुए हैं ....?
चलो दोस्तों को तो छोड़ो ...हद तो ये है की रिश्तेदार ....तक कभी खोज खबर नहीं लेते.....चाहे मुझे कुछ भी हुआ हो  ..
मजाल हो मुझे कोई फ़ोन कर ले....सब हाल हवाल लेते है मेरी माता जी से ...पता नहीं क्यों ? 
सोच यहाँ फिर पनप जाती हैं और रिश्तेदारों से साली  दूरी अपने आप पनप जाती हैं !
कभी कभी सब से बात करना मिस करता हूँ,वो कॉलेज की मस्ती वो बचपन मैं "SO CALLED "प्यार मिस करता हूँ 
वो बुआ मासी मामा ....सब को मिस तो करता हूँ पर कभी ..अपनी सोच से हट के CONTACT नहीं करता हूँ   
सोचता हूँ सोचता हूँ ....अजीब हैं पर पता नहीं ...अब साला सोचने मैं ही सुकून मिलता हैं !

Saturday, 26 February 2011

few things I wrote in past few weeks

The book of LIFE should contain few chapter on your failures ...
a few on your success, a few on your learning's and many blank pages to write the new chapters ......yourself ;)
 
You cannot change His PLAN but you can change yourself so that He changes His PLAN according to new you !

Tuesday, 18 January 2011

नींद से लड़ाई

 THIS ONE came off in general was telling something to my frnd and eventually idea of this came out

कभी नींद के आगोश से निकल के देखो ...कभी वो आती हुई नींद से लड़के देखो.. 
वो उबासी से कहना जा थोड़ी देर बाद आना...वो नींद से लड़ना करना कोई बहाना
वो बैठे बैठे आँखो को बंद होने से रोकना ज़रा, वो थोड़ी देर और कंट्रोल करना नींद को उनके लिए ज़रा..इसी मैं तो मज़ा हैं

कभी किसी से बात करते हुए सोने का मज़ा लेना ...कभी नींद मैं बात करना और कभी बात-बात मे ही नींद ले लेना
कभी इंतेजार मे किसी चीज़ की वो पल दो पल नींद की खुमारी से लड़ने का अलग ही मज़ा हैं !  बाकी - 
सोते तो सभी हैं- चादर तान-के बिस्तर मे पर वो  मस्त होके टेबल पे मूह रखके थोड़ी सी थूक निकल के ...सोने का अलग ही मज़ा हैं !

वो खुमारी मे..आके अंगड़ाई मे हाथ उठना फिर सोचना की अभी सोना क्यों?अभी तो नींद के साथ थोड़ा लड़ना-झगड़ना हैं ..मुझे....अभी तो उसके लिए जागना हैं ....यू इस तरह वो कॉफी बनाने जाती..हैं ! .....और कॉफी बनाते बनाते बेचारी मासूम खड़े खड़े एक छोटी सी झपकी लगा जाती हैं
इंतेज़ार मैं उसके वो 3-4 कप कॉफी के पी गयी साला ना वो आया और ना नींद, बेचारी क्या करे उसकी नींद तो कब की गयी ?
वो आया कुछ घंटे देर से..तडपा तडपा के उसे बस हो गयी साली लड़ाई ! ज़ालिम !
दोनो के रूठने मानने मैं साली रात जवान होके सुबह बन गयी बात जो करनी थी वो तो हुई नहीं लड़ाई परवान चढ़ गयी

अब फाइनली हीरो की लाख कोशिश और हाथ-पाँव जोड़ने के बाद हेरोइन मान गयी अपने लल्लू हीरो को पहचान गयी की उसका मोबाइल था खराब ..नेट ज़ालिम नही चल रहा था ...यह झूठ, झूठ- मूठ मान गयी ! ...फिर
फिर क्या आज की रात का वादा करके ....हेरोइन बेड मैं चादर तान गयी :)
अगली रात फिर हीरो ने नींद से करी लड़ाई पर हीरो की हेरोइन टाइम पे आई |

Thursday, 16 December 2010

100 रूपये मैं आता क्या है

 आज जब खली बैठा था रोजाना के जैसे मन मैं ख्याल आया "100 रूपये मैं आता क्या है "
पुछा मैंने अलग अलग लोगो से "क्या आता हैं १०० रूपये मैं ...और जवाब कुछ यू थे ...
१०० रूपये मैं मुझ गरीब का  हफ्ते भर का खाना हो जाता है...१०० रूपये मैं रोटी सब्जी और लकड़ी सब हो जाता है ..१०० रूपये  कामता हूँ बन जाती हैं बात
और अमीर बोला १०० रूपये मैं मेरा दाड भी गीला नहीं हो पता हैं....१०० रूपये मैं एक छोटा पिज्जा भी नहीं आता है  ....मजाक करते हो १०० रूपये  की क्या  है औकात 
एक ग्रेह्णी बोली १०० रूपये मैं मेरा सिन्दूर आ जाता हैं....वाही बाज़ार मैं कड़ी लड़की बोली १०० रूपये मैं उसकी जवानी का रस कोई छीन जाता हैं
१०० रूपये मैं किसी का बच्चा स्कूल मैं पढ़ जाता हैं १०० रूपये मैं किसी अमीर के बच्चे का एक पेन आता हैं
१०० रूपये मैं किसी के पूरे कपडे आ जाते है १०० रूपये मैं कुछ लोग अपनी चड्डी तक नहीं ले पाते हैं
१०० रूपये मैं कोई बस एक कॉफी पी जाता हैं ..१०० रूपये मैं वहीँ कोई ज़िन्दगी जी जाता हैं
दोस्तों से पुछा "१०० रूपये मैं क्या आता हैं जवाब थे सिग्गी का एक पैक ..१० दिन गोल्गापे..महेंदर पे TREAT हो जाता है
१०० रूपये किसी जरूरतमंद को देदो....उसका नसीब बन जाता है
ऐसे १०० रूपये ये सोच के दो की साला १०० रूपये मैं आता ही क्या है
पर हम ये ना सोच के सोचने लगते हैं आब "साला १०० रूपये  तो बहुत जादा हैं भाई ..१०० रूपये मैं बहुत कुछ आ जायेगा ..मेरे साला २ रूपये मैं ही इस बेचारे का काम बन जायेगा
१०० रूपये मैं आखिर आता ही क्या हैं sir  ? १०० रूपये की वजह से कई लोग काट देते हैं सर 
१०० रूपये मैं साला तुम्हारा क्या आ जायेगा १०० रूपये दो किसी जरूरतमंद को उसका तो लाइफ बदल जायेगा

Saturday, 23 October 2010

random Thoughts


wake up in the morning ..aah bug offf the alarm... He'll do my proxy yey
sleepless nights caz tomorrow is my exam have to study ...oye
it so happened the 5 years went so fast...even the present.... today looks as if.... it is damnnn THE Past
the time came i got my degree i couldn express brother...."did i loose....the LIFE" or have gained some other ....
friends are gone the profies set aback cultural activities dramatics....passion and almost everything snatched back
it feels like heaven when i was there....and right below is the story when damnnnn....i am HERE

wake up in the morning ..OH shit..euuuuu Yuck... i am late for work OHH lorD oh Fuck
sleeping at 12:00 was never my game....yess job is the culprit .corporate is the name
it so happend the last 1 year was damnnnn so slow.... going to office each day was a thought of big NO NO ....
the time came i just had my appraisal ....i wanted to express Oh ..damn u my brother ...but no one gave me any opportunity ...they juss spoke one after the other
friends yes i do remember but WE don't get time to share.....we are the same WE inside yes WE still do care 
it doesn feel like heaven anyday in here ...and yes this was all i had to share 

Tuesday, 19 October 2010

LIFE...how it izzzz

Once life had a meaning ,.....or say i atleast thought it had one......was silly ..was enthusiastic..was energetic.....talketive......curious,...wanted to conquer everything :D /...
there were people in life called friends ....there were moments in life called JOY all by themselves

now something occurred JOB occurred ...everything changed drastically friends got on to their paths...which led somewhere else....now only memories pertain ...
curiosity ..energy....enthusiasm without them have all diminished .....there's nothing in my vicinity know as friends  ,,,,,there is no phenomenon "Joy" occurring all by itself .. There is happiness but joy is missing 

i guess life changes after we get into corporate world ...i guess everyone ..called my friends feels similar to me....

Monday, 27 September 2010

ना जाने

ना जाने कितनी लाशे बिछी हैं सपनो की अरमानो की मेरे दुसरो के हाथ 
कुछ अरमान ऐसे भी हुए जिनका गला हमने खुद ही घोटा और नहीं छोड़ा तड़पने तक साथ 
कुछ तड़पते आरमान, अब  भी दिल और दिमाग मैं बसे हुए ही हैं शायद
या उनकी छवी सी मन मैं बस गए हैं और वो कब का दम तोड़  दिए हैं ...जा चुके हैं मेरी इस दुनिया से शायद
पर ये निरा मन नजाने क्यों उन सपनो को अरमानो की सडती  लाश की पहरेदारी करता रहता हैं 
कुछ अरमान नए आते हैं, कुछ नए खवाब  देखूं तो..... नजाने कौन उनका कतल करता हैं 
कभी लगता इन सब के पीछे कोई साज्ज़िश तो नहीं ??
कहीं कोई कर रहा इस बन्दे की आज़माइश तो नहीं 
ना जाने इतने सपने इतने अरमान क्यों आते हैं इस गरीब के मन मैं
और झूठे मूठे से इन खयालो से ये गरीब अमीर हो जाता है
किसी दूसरी सी ही दुनिया मैं खो जाता हैं ...
ज़िन्दगी पहेली सी बनती जाती हैं .,,,, साली ये अरमानो  की लाश बस सड़ते ही जाती हैं
नए अरमा नए ख्वाब देखता हूँ बेखबर  नयी लाशे नए कतल करता हूँ... करवाता हूँ ...भर भर कर 
फिर भी कहाँ आता हूँ मैं  बाज़, नए अरमानो को जीवन मैं भरता हूँ बस यूह करता हूँ अपनी ज़िन्दगी का आगाज़ 

Wednesday, 18 August 2010

महंगाई

जब  महंगाई  सर  चढ़  जाये ...जब  तनख्वाह  मैं  rise ना  आये ..जब  आपके  दोस्त  ऐश  करे  और  आपकी  जलती  जाये .
जब  हो  जेब  खली  बैंक  बैलेंस  tight..खुश  रहने   मैं  हो  जाये  fight ..
जब  लेने  हो  कपडे  LEE या  levis, सोच  मैं  पढ़े  मन  और  आये  अंदर  से  voice
आपकी  निगाहें  KOUTONS या  charlie outlaw के  80% पे  गढ़  जाये  और  लगे  यही  हैं  राईट  चोइस
जब  बाहर जाके  भी  pizza की  जगह  समोसा  खाना  पढ़े  मेरे  भाई  …

मोबाइल recharge करने से पहले सोचन पढ़े....पेट्रोल के दाम की वजह से गाड़ी को शेयर करने लगे
Accounts मैं पैसे का हिसाब किताब करते रात भर जगराता करने लगे...
आपके treats चाय की थडी पे होने लगे...DUTCH TREAT मैं आपकी जान सूखने लगे मेरे भाई 
समझ  लो  भैया  महंगाई  ने  आच्छे  से   तुम्हारी  माँ  हैं  लगाई...... :) 

Wednesday, 7 April 2010

दुःख

well this one came off in general ...nothing so spcl !
मैं आसमा सा विशाल हूँ, सागर सा गहरा हूँ
बर्फ की ठंडक से ठंडा हूँ, सूरज की गर्मी से गरम हूँ
मैं सर्व विद्यमान हूँ, मैं "दुःख" हूँ
आता हूँ जाता हूँ ....और फिर से लौट के आता हूँ
कभी कम कभी जादा....तुमको सताता हूँ
रात-दिन, सुबह या शाम, कभी नहीं भुला पाते हो तुम मेरा नाम
सुख मैं भी मेरे न आने की कामना करते हो
तुम मुझे अपनी ज़िन्दगी से कहाँ अलग करते हो
कभी आता हूँ कभी तुम खुद मुझे लेके आते हो
दुःख कब जायेगा ज़िन्दगी से,  प्रभु से बस ये ही गुहार लगते हो 
किसी के दुःख से दुखी होते हो और किसी के दुःख को देख लेते मज़ा
मैं "दुःख" लाता हूँ ज़िन्दगी मैं सज़ा
मैं चिरस्थायी हूँ, जीवंत हूँ ..... मैं हूँ सर्वगामी,
मैं ही हूँ ओ मानव तुम्हारे बुरे वक्त का स्वामी
कुछ लोग दुःख मैं भी खुश रह पते हैं
ऐसे  ही लोग ज़िन्दगी मैं आगे बढ़ पाते हैं
.दुःख को बुरे वक्त मैं अपना साथी बनाओ ....इस दुःख से डर  के नज़र न चुराओ
 दुःख मैं डटे रहो हारो ना लड़ने से पहले तुम  खो ना देना आस
दुःख ही करता हैं सुख को सुखी का  आभास 

Monday, 29 March 2010

.........

तेरे एहसास को तरसना, तेरी छुअन को न महसूस कर पाना
तेरी परछाई को पर्छियों में तलाशना, तेरी आहट होने का  इंतज़ार करना
तेरी होटों से दो शब्द सुनने की तमन्ना रखना, तेरी साए में रहने की गुज़ारिश करना
तेरे हर कदम पे तेरा साथ देने की तमन्ना, तेरे साथ को तरसना
तेरे बिन हर पल यूँ छटपटाना, अधुरा अधुरा सा महसूस करना
तेरे बिन बस यूँ ही जीने के लिए सांसे लेना, ज़िन्दगी का अर्थ - व्यर्थ समझना
तेरे साथ जिंदगी का अर्थ तलाशने  की तमन्ना रखना, सांसो को जीवंत करना 
तू मिल जाये बस दिन रात यही दुआ करना, तू खुश रहे यही कामना करना
तेरे बिन  कैसी है ये  बेकरारी , तू मिल जाये तो ज़िन्दगी मैं फिर से भरेंगी खुशियाँ सारी
तेरे गोद में सर रख के सोने की तमना रखना, तेरे साये में ज़िन्दगी बसर करना ...
तेरे साथ घंटो बातें करने , सूरज जला के बुझाना यही तमन्ना करना   .
तेरे बिन जी न पाएंगे हम, तू समझता नहीं इस प्यार को मेरे .....बस इस दीवानी का यही हैं गम

  

Sunday, 28 March 2010

तुम

आंसू  भी  सुख  गए  ..
तेरी  तस्वीर  से   रंग  गए ....
तू  नहीं  पर  तेरी  यादें  थी  यही
तेरे  सिवा  मेरा  अपना  कोई  नहीं .....
जाना  था  तुझे , पाना  था  तुझे .....
एक  ही पल  में  अपना  सबकुछ माना  था  तुझे
फिर  एक   पल  में  हम तुमसे  जुदा  हो  गए
हम  नजाने  फिर  से  क्यों  अनजाने  हो  गए .....
सोचा  था  जी  लूँगा  बिना  तेरे  यहाँ
पर तेरी  यादो  से  बच  के  जाऊँगा  मैं कहाँ
तुझे  भुला  नहीं  पता  हूँ
तेरी  यादों  मैं  तन्हाई  से  लिपट सा  जाता  हूँ
आंसू  आब  नम  हो  गए  हैं .....
तुम्हारी  याद  मैं  इस जीवन  के  पल  और काम  हो  गए  हैं
तुम  वापिस  आओगे  मेरे  पास,
बस  यही  करता रहता  है   दिल  मेरा,  याद करते हुए आस |

------------------------
बीरेन भाटिया 

Saturday, 19 December 2009

सोच.....अजीब

एक आवाज़ सी आई ...पलट के देखा कोई नहीं था, सोचा किसी दोस्त ने पुकारा होगा या कोई रिश्तेदार होगा
तभी दिमाग से आवाज़ आई, अरे भाई ...रिश्ते नातो की सारी डोर तो तू पहले ही तोड़ आया हैं, अब पलट के क्या होगा, ..........सोच में पडा और .....ये सब लिख बैठा मैं ,
सबसे अलग सबसे दूर हो गया मैं, सबे मिलता था , हस्त खेलता था, अब खामोश हो गया हूँ मैं ,
बदलना चाहता नहीं था, पर बदल गया हूँ मैं, दूर जाना नहीं चाहता था पर दूर आ गया हूँ मैं
चेहरे पे हँसी रखता हूँ , हँसता हूँ - हसता हूँ , दिखता हूँ टेंशन नहीं हैं, पर घबराता हूँ, अब दुखी रहता हूँ मैं
याद तो बहुत कुछ हैं पर, आब उन यादो को भूलता जा रहा हूँ मैं ,
कहने को नए दोस्त बनाये हैं, उन दोस्तों मैं पुराने यारु की छवी ढूँढता हूँ मैं
कहीं ख़ुशी मिलती है पल भर के लिए तो उसके बाद के गम को सोच कर....उससे खुस हो जाना भूल जाता हूँ मैं
कभी सोना भूलता हूँ, तो कभी जागना भूल जाता हूँ मैं,
जिनसे प्यार हैं, उनसे इज़हार भी नहीं कर पता हूँ मैं
कुछ करना चाहता हूँ, फिर से बदलना चाहता हूँ पर आब बदल नहीं पा रहा हूँ मैं
ये बदलाव कहीं फिर से उन छवी वाले दोस्तों से दूर न करदे.....और फिर से बिलकुल अकेला हो जाऊं मैं
सोचा था ख़ुशी का क्या कहीं भी मिल जाएगी, पर ख़ुशी भी हर किसी के साथ ख़ुशी बन के नहीं रहती और यही सब सोचता रहता हूँ मैं
दुसरे कुछ कहते हैं, कुछ दिल की बतलाते हिं, पर दिल का हाल कुछ भी बता नहीं पता हूँ मैं
अपने आप से केई वादे करता हूँ, फिर हर वादे को तोड़ता जाता हूँ मैं
सवालो से घिरा हुआ हूँ, जवाब चाहता हूँ मैं
किसी अपने की, आवाज़ - पुकार सुनना चाहता हूँ मैं

Thursday, 18 June 2009

Mr ME

It is simple yet complex because of the simplicity it carries out with itself,
Its essential, its adaptable and can be lost
I am scared, afraid..Deep inside, to show the world, the REAL mee
Once they know, they may or may not like mee
I adapt, I change from person to person in course of meeting them, knowing them
I evolve, I am YOUR "Identity" the REAL you inside YOU.
I see the mirror and sometimes i cannot see Mee, caz you are busy adapting or evolving

One question digs me deeep down "is there anyone out there, who really understands REAL me"
caz its not even me, who knows this me
I do things that this inner me says no to and not doing some he says yes to
making it angry and mad at me and now this inner ME has decided not to show, talk
It does not care anymore about me, and stays in some other Dimension, a dimension where me tries to go and catch it but it wanders freely from one ZONE to another but i have to stop the search caz me has boundaries, limitation it cannot cross or say doesn wanaa cross
so me stops and this me and inner me have created a Dual in my life
i am confused and in a state of duality what to do....hope both of them end this dual and ....meet to become ME :)

Thursday, 30 April 2009

कल कुछ आपनी ही उधेड़बुन मैं था, खोया था मैं खयालो में, ढूँढ रहा था सवाल आपने सवालो में
अगर खुशी मिल जाए आज तो, कल क्या रहेगी इसीके ख्याल मैं ये खुशी निकल जायेगी |
आधी ज़िन्दगी बीत जायेगी इस ख्याल में की आगे का क्या?और बाकि आधी इसी ख्याल में की पहले ये क्यों किया
हम क्यों नहीं आपने आज में जी पाते हैं, कल की फ़िक्र कल पर छोड़ के हम क्यों नहीं खुल के खुशी बनते हैं |
मेरी खुशी को कही किसी और की नज़र न लगे इसलिए पड़ोसी से तो छोड़ो अपने रिश्तेदारों से भी छुपाते हैं
हर पल हर समय एक इन्सेकुरिटी सी महसूस करते हैं, जिससे प्यार करते हैं, उसी पे सबसे जादा शक करते हैं |
इसके घर में ये हुआ उसके घर में वो आया की उधेड़बुन में ख़ुद के घर को नज़रंदाज़ करते हैं
अपने सर पर मुसीबत आती हैं तो वो मुसीबत लगती हैं, दुसरो की मुसीबत मुसीबत कहाँ लगती हैं
कहीं कोई गिरा होता है तो बस यही सोच के आगे बढ़ जाते हैं , कोई तो उठा ही लेगा
जब ख़ुद ठोकर खाते हैं तो सहारा तो छोटी चीज्ज़ हैं मरहम ही आस लगा लेते हैं
न सहारा मिलता हैं न मरहम तो कहते हैं दुनिया कितनी बेदर्द हैं, जालिम हैं मतलबी है
इसे जालिम मतलबी हम ने ही तो बनाया हैं, हर छोटी बड़ी चीज़ के ज़िम्मेदारी कही न कहीं हमारी ही हैं
वो थोडी सी लापरवाही, वो थोडी सी लालच, वो थोड़ा सी जिम्मेदारी न निभाना सब कुछ
दिल से कोई बुरा नहीं होता, उसके आसपास के हालत उन्हें ऐसा बनने पे मजबूर करते हैं
ऐसा कमज़ोर कैरेक्टर के लोग कहते हैं, जिनका ज़मीर बहुत कमज़ोर होता हैं
अगर हम आज से ही सही निति अपनाए जिम्मेदारियां पूरी करें लापर्वाव्ही न करे तो ऊपर लिखी कोई चीज़
हमारे दूर दूर तक नही आएगी, और ये ज़िन्दगी आची हो जायेगी
वापिस अपनी उधेड़बुन से वापिस आता हूँ , कहीं और अपने खयालो का जाल बनता हूँ
बिरेन भाटिया