Monday, 27 September 2010

ना जाने

ना जाने कितनी लाशे बिछी हैं सपनो की अरमानो की मेरे दुसरो के हाथ 
कुछ अरमान ऐसे भी हुए जिनका गला हमने खुद ही घोटा और नहीं छोड़ा तड़पने तक साथ 
कुछ तड़पते आरमान, अब  भी दिल और दिमाग मैं बसे हुए ही हैं शायद
या उनकी छवी सी मन मैं बस गए हैं और वो कब का दम तोड़  दिए हैं ...जा चुके हैं मेरी इस दुनिया से शायद
पर ये निरा मन नजाने क्यों उन सपनो को अरमानो की सडती  लाश की पहरेदारी करता रहता हैं 
कुछ अरमान नए आते हैं, कुछ नए खवाब  देखूं तो..... नजाने कौन उनका कतल करता हैं 
कभी लगता इन सब के पीछे कोई साज्ज़िश तो नहीं ??
कहीं कोई कर रहा इस बन्दे की आज़माइश तो नहीं 
ना जाने इतने सपने इतने अरमान क्यों आते हैं इस गरीब के मन मैं
और झूठे मूठे से इन खयालो से ये गरीब अमीर हो जाता है
किसी दूसरी सी ही दुनिया मैं खो जाता हैं ...
ज़िन्दगी पहेली सी बनती जाती हैं .,,,, साली ये अरमानो  की लाश बस सड़ते ही जाती हैं
नए अरमा नए ख्वाब देखता हूँ बेखबर  नयी लाशे नए कतल करता हूँ... करवाता हूँ ...भर भर कर 
फिर भी कहाँ आता हूँ मैं  बाज़, नए अरमानो को जीवन मैं भरता हूँ बस यूह करता हूँ अपनी ज़िन्दगी का आगाज़ 

Wednesday, 18 August 2010

महंगाई

जब  महंगाई  सर  चढ़  जाये ...जब  तनख्वाह  मैं  rise ना  आये ..जब  आपके  दोस्त  ऐश  करे  और  आपकी  जलती  जाये .
जब  हो  जेब  खली  बैंक  बैलेंस  tight..खुश  रहने   मैं  हो  जाये  fight ..
जब  लेने  हो  कपडे  LEE या  levis, सोच  मैं  पढ़े  मन  और  आये  अंदर  से  voice
आपकी  निगाहें  KOUTONS या  charlie outlaw के  80% पे  गढ़  जाये  और  लगे  यही  हैं  राईट  चोइस
जब  बाहर जाके  भी  pizza की  जगह  समोसा  खाना  पढ़े  मेरे  भाई  …

मोबाइल recharge करने से पहले सोचन पढ़े....पेट्रोल के दाम की वजह से गाड़ी को शेयर करने लगे
Accounts मैं पैसे का हिसाब किताब करते रात भर जगराता करने लगे...
आपके treats चाय की थडी पे होने लगे...DUTCH TREAT मैं आपकी जान सूखने लगे मेरे भाई 
समझ  लो  भैया  महंगाई  ने  आच्छे  से   तुम्हारी  माँ  हैं  लगाई...... :) 

Wednesday, 7 April 2010

दुःख

well this one came off in general ...nothing so spcl !
मैं आसमा सा विशाल हूँ, सागर सा गहरा हूँ
बर्फ की ठंडक से ठंडा हूँ, सूरज की गर्मी से गरम हूँ
मैं सर्व विद्यमान हूँ, मैं "दुःख" हूँ
आता हूँ जाता हूँ ....और फिर से लौट के आता हूँ
कभी कम कभी जादा....तुमको सताता हूँ
रात-दिन, सुबह या शाम, कभी नहीं भुला पाते हो तुम मेरा नाम
सुख मैं भी मेरे न आने की कामना करते हो
तुम मुझे अपनी ज़िन्दगी से कहाँ अलग करते हो
कभी आता हूँ कभी तुम खुद मुझे लेके आते हो
दुःख कब जायेगा ज़िन्दगी से,  प्रभु से बस ये ही गुहार लगते हो 
किसी के दुःख से दुखी होते हो और किसी के दुःख को देख लेते मज़ा
मैं "दुःख" लाता हूँ ज़िन्दगी मैं सज़ा
मैं चिरस्थायी हूँ, जीवंत हूँ ..... मैं हूँ सर्वगामी,
मैं ही हूँ ओ मानव तुम्हारे बुरे वक्त का स्वामी
कुछ लोग दुःख मैं भी खुश रह पते हैं
ऐसे  ही लोग ज़िन्दगी मैं आगे बढ़ पाते हैं
.दुःख को बुरे वक्त मैं अपना साथी बनाओ ....इस दुःख से डर  के नज़र न चुराओ
 दुःख मैं डटे रहो हारो ना लड़ने से पहले तुम  खो ना देना आस
दुःख ही करता हैं सुख को सुखी का  आभास 

Monday, 29 March 2010

.........

तेरे एहसास को तरसना, तेरी छुअन को न महसूस कर पाना
तेरी परछाई को पर्छियों में तलाशना, तेरी आहट होने का  इंतज़ार करना
तेरी होटों से दो शब्द सुनने की तमन्ना रखना, तेरी साए में रहने की गुज़ारिश करना
तेरे हर कदम पे तेरा साथ देने की तमन्ना, तेरे साथ को तरसना
तेरे बिन हर पल यूँ छटपटाना, अधुरा अधुरा सा महसूस करना
तेरे बिन बस यूँ ही जीने के लिए सांसे लेना, ज़िन्दगी का अर्थ - व्यर्थ समझना
तेरे साथ जिंदगी का अर्थ तलाशने  की तमन्ना रखना, सांसो को जीवंत करना 
तू मिल जाये बस दिन रात यही दुआ करना, तू खुश रहे यही कामना करना
तेरे बिन  कैसी है ये  बेकरारी , तू मिल जाये तो ज़िन्दगी मैं फिर से भरेंगी खुशियाँ सारी
तेरे गोद में सर रख के सोने की तमना रखना, तेरे साये में ज़िन्दगी बसर करना ...
तेरे साथ घंटो बातें करने , सूरज जला के बुझाना यही तमन्ना करना   .
तेरे बिन जी न पाएंगे हम, तू समझता नहीं इस प्यार को मेरे .....बस इस दीवानी का यही हैं गम

  

Sunday, 28 March 2010

तुम

आंसू  भी  सुख  गए  ..
तेरी  तस्वीर  से   रंग  गए ....
तू  नहीं  पर  तेरी  यादें  थी  यही
तेरे  सिवा  मेरा  अपना  कोई  नहीं .....
जाना  था  तुझे , पाना  था  तुझे .....
एक  ही पल  में  अपना  सबकुछ माना  था  तुझे
फिर  एक   पल  में  हम तुमसे  जुदा  हो  गए
हम  नजाने  फिर  से  क्यों  अनजाने  हो  गए .....
सोचा  था  जी  लूँगा  बिना  तेरे  यहाँ
पर तेरी  यादो  से  बच  के  जाऊँगा  मैं कहाँ
तुझे  भुला  नहीं  पता  हूँ
तेरी  यादों  मैं  तन्हाई  से  लिपट सा  जाता  हूँ
आंसू  आब  नम  हो  गए  हैं .....
तुम्हारी  याद  मैं  इस जीवन  के  पल  और काम  हो  गए  हैं
तुम  वापिस  आओगे  मेरे  पास,
बस  यही  करता रहता  है   दिल  मेरा,  याद करते हुए आस |

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बीरेन भाटिया 

Saturday, 19 December 2009

सोच.....अजीब

एक आवाज़ सी आई ...पलट के देखा कोई नहीं था, सोचा किसी दोस्त ने पुकारा होगा या कोई रिश्तेदार होगा
तभी दिमाग से आवाज़ आई, अरे भाई ...रिश्ते नातो की सारी डोर तो तू पहले ही तोड़ आया हैं, अब पलट के क्या होगा, ..........सोच में पडा और .....ये सब लिख बैठा मैं ,
सबसे अलग सबसे दूर हो गया मैं, सबे मिलता था , हस्त खेलता था, अब खामोश हो गया हूँ मैं ,
बदलना चाहता नहीं था, पर बदल गया हूँ मैं, दूर जाना नहीं चाहता था पर दूर आ गया हूँ मैं
चेहरे पे हँसी रखता हूँ , हँसता हूँ - हसता हूँ , दिखता हूँ टेंशन नहीं हैं, पर घबराता हूँ, अब दुखी रहता हूँ मैं
याद तो बहुत कुछ हैं पर, आब उन यादो को भूलता जा रहा हूँ मैं ,
कहने को नए दोस्त बनाये हैं, उन दोस्तों मैं पुराने यारु की छवी ढूँढता हूँ मैं
कहीं ख़ुशी मिलती है पल भर के लिए तो उसके बाद के गम को सोच कर....उससे खुस हो जाना भूल जाता हूँ मैं
कभी सोना भूलता हूँ, तो कभी जागना भूल जाता हूँ मैं,
जिनसे प्यार हैं, उनसे इज़हार भी नहीं कर पता हूँ मैं
कुछ करना चाहता हूँ, फिर से बदलना चाहता हूँ पर आब बदल नहीं पा रहा हूँ मैं
ये बदलाव कहीं फिर से उन छवी वाले दोस्तों से दूर न करदे.....और फिर से बिलकुल अकेला हो जाऊं मैं
सोचा था ख़ुशी का क्या कहीं भी मिल जाएगी, पर ख़ुशी भी हर किसी के साथ ख़ुशी बन के नहीं रहती और यही सब सोचता रहता हूँ मैं
दुसरे कुछ कहते हैं, कुछ दिल की बतलाते हिं, पर दिल का हाल कुछ भी बता नहीं पता हूँ मैं
अपने आप से केई वादे करता हूँ, फिर हर वादे को तोड़ता जाता हूँ मैं
सवालो से घिरा हुआ हूँ, जवाब चाहता हूँ मैं
किसी अपने की, आवाज़ - पुकार सुनना चाहता हूँ मैं

Thursday, 18 June 2009

Mr ME

It is simple yet complex because of the simplicity it carries out with itself,
Its essential, its adaptable and can be lost
I am scared, afraid..Deep inside, to show the world, the REAL mee
Once they know, they may or may not like mee
I adapt, I change from person to person in course of meeting them, knowing them
I evolve, I am YOUR "Identity" the REAL you inside YOU.
I see the mirror and sometimes i cannot see Mee, caz you are busy adapting or evolving

One question digs me deeep down "is there anyone out there, who really understands REAL me"
caz its not even me, who knows this me
I do things that this inner me says no to and not doing some he says yes to
making it angry and mad at me and now this inner ME has decided not to show, talk
It does not care anymore about me, and stays in some other Dimension, a dimension where me tries to go and catch it but it wanders freely from one ZONE to another but i have to stop the search caz me has boundaries, limitation it cannot cross or say doesn wanaa cross
so me stops and this me and inner me have created a Dual in my life
i am confused and in a state of duality what to do....hope both of them end this dual and ....meet to become ME :)